» क्षेत्रीय स्टेशन, पालमपुर

परिचय

क्षेत्रीय केन्द्र, पालमपुर को मूलतः क्षेत्रीय पशु-पोषण अनुसंधान केंद्र के नाम से जाना जाता था। इसे भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद के अंतर्गत एक विकास योजना के रूप में तब पंजाब राज्य के पशुपालन विभाग की एक गतिविधि के रूप में 26 जनवरी 1959 को स्वीकार किया था। इस केन्द्र की स्थापना का उद्देश्य क्षेत्रीय (उत्तर-पश्चिम हिमालय क्षेत्र अर्थात हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों) पशु पोषण समस्याओं पर अनुसन्धान एवं उनका निराकरण करना था। विकास योजना के आरम्भ होने के कुछ समय पश्चात, 1 दिसंबर, 1962 को इसका प्रशासनिक नियंत्रण राज्य सरकार से नव-स्थापित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पी.ए.यू.) को स्थानांतरित किया गया। कार्यात्मक आधार पर इस केंद्र को 1964 में पी.ए.यू. के अंतर्गत स्थापित किया गया।

1970 के उत्तरार्ध में क्षेत्रीय पशु रोगों पर भी अनुसन्धान आरम्भ किया गया। तब से लेकर आज तक इस केन्द्र में वैज्ञानिक अनुसंधान में निरंतर प्रगति हुई है। अनुसन्धान की गुणवता एवं किसानोपयोगी सेवाओं के कारण इस केन्द्र की विशेष पहचान बनी हुई है। इस केंद्र ने अपर्याप्त वैज्ञानिक कर्मचारियों की स्थिति के बावजूद अनुसन्धान में एक स्थिर, प्रभावी एवं प्रगतिशील तालमेल बनाए रखा है। वर्ष 1978 तक, इस केन्द्र में औसतन 3 से अधिक अनुसंधान कार्यकर्ताओं की नियुक्ति नहीं हुई। कृषि अनुसंधान सेवा के गठन के साथ ही, इस केंद्र में वैज्ञानिकों की संख्या में वृद्धि हुई और 1980 में एक रोग जांच प्रयोगशाला का सृजन किया गया ताकि पशु रोग जांच और निदान की दिशा में विस्तार किया जा सके। वर्तमान में, क्षेत्रीय केन्द्र में 5 विभिन्न विषयों के वैज्ञानिक कार्यरत हैं।

केन्द्र के वैज्ञानिकों ने क्षेत्रीय महत्व की घास, पेड़ों एवं पशु-चारे में उपयोग आने वाले वनस्पति स्त्रोतों एवं पशु रोगों पर विस्तृत अनुसन्धान किया है। इन उपलब्धियों को विभिन्न माध्यमों तथा कार्यक्रमों द्वारा दूर-दराज क्षेत्रों में कृषकों एवं पशुपालकों तक पहुंचाया जा रहा है। इस केन्द्र में अनुसन्धान के लिए सुसज्जित प्रयोगशालाएं और सहायक आधारभूत सुविधायें उपलब्ध हैं। इसके साथ ही यह केंद्र अनुसन्धान संस्थानों जैसे- सी.एस.आई.आर.-आई.एच.बी.टी. पालमपुर एवं हि. प्र. कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की सहभागिता में अनुसंधान और शैक्षिक गतिविधियों के लिए प्रयासरत है।